Brahma Kumaris
14 - क्या हमने अपने वास्तविक स्वरूप को भुला दिया है?

14 - क्या हमने अपने वास्तविक स्वरूप को भुला दिया है?

BK Shivani

31:16

Essence

कभी हमने अपने आप से पूछा है…

मैं शांति कहाँ ढूँढ रहा हूँ?

जब सब ठीक हो जाएगा?

जब लोग बदल जाएँगे?

जब परिस्थितियाँ मेरे अनुसार हो जाएँगी?

जब मुझे सबका प्यार मिल जाएगा?

धीरे-धीरे हमें पता ही नहीं चलता कि हम जिस शांति, प्रेम, खुशी और शक्ति की तलाश कर रहे हैं… उन्हें बाहर खोजते-खोजते अपने भीतर देखना ही भूल गए हैं।

**"जब यह मिलेगा, तब मैं खुश और शांत हो जाऊँगा"— **यही programming धीरे-धीरे हमारे मन की पहचान बन जाती है।

लेकिन Being Bliss हमें एक बहुत सुंदर प्रश्न के सामने खड़ा करता है—

क्या शांति, प्रेम और आनंद सचमुच बाहर मिलने वाली चीज़ें हैं…

या वे हमारी original nature हैं, जो केवल पुराने संस्कारों और अनुभवों की परतों के नीचे छिप गई हैं?

एक ऐसा संवाद… जो हमें बाहर नहीं, अपने भीतर देखने के लिए आमंत्रित करता है…

जो हमें सोचने पर मजबूर करता है…

क्या मुझे बदलना है… या केवल अपने वास्तविक स्वरूप को फिर से याद करना है?

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