7 दिवसीय कोर्स के साथ अपनी आध्यात्मिक यात्रा की करें शुरुआत (भाग 3)

आत्मा और परमात्मा के ज्ञान को जानने के बाद, हम ब्रह्माकुमारिज़ के 7 डेज कोर्स के माध्यम से, वर्ल्ड ड्रामा क्या है और यह कैसे गोल्डन ऐज/ सतयुग, सिल्वर ऐज/ त्रेता युग, कॉपर ऐज/ द्वापरयुग और आयरन ऐज/ कलियुग जैसे 4 युगों- जिसमें हम सबके अलग-अलग जन्म होते हैं, से बना हुआ है के बारे में जानते हैं।
परमात्मा हमें बताते हैं कि, यह वर्ल्ड ड्रामा 5000 वर्ष का है और ऊपर बताए गए 4 युगों में से प्रत्येक युग की अवधि 1250 वर्ष है।
5000 वर्षों का यह ड्रामा, पृथ्वी ग्रह की इस भौतिक दुनिया में अनंत काल तक बारम्बार खुद को दोहराता है। 5000 वर्षों के दौरान, मानव आत्माएं अपनी पवित्रता के आधार पर, इस फिज़िकल वर्ल्ड में, अलग-अलग रोल या जन्म लेने के लिए, अलग-अलग समय पर सोल वर्ल्ड से इस फिज़िकल वर्ल्ड में आती हैं। पूर्णतः पवित्र आत्माएं पृथ्वी पर पहले आती हैं। हर 5000 वर्षों के वर्ल्ड ड्रामा के एंड में, परमात्मा सभी आत्माओं को शुद्ध करते हैं और, सभी आत्माएं शुद्धिकरण के बाद वापस सोल वर्ल्ड में लौट जाती हैं, और वर्ल्ड ड्रामा के रिपीटिशन में; आराम और साइलेंस के ड्यूरेशन के बाद वापस इस फिज़िकल वर्ल्ड में अपने निश्चित समय पर आती हैं।
वर्ल्ड ड्रामा के पहले 2 युग/ 2500 वर्ष जो पॉजिटीविटी और प्यूरिटी से भरपूर हैं जिनमें कोई दुःख और अशान्ति नहीं है, जहाँ कोई अकाल मृत्यु नहीं, सम्पूर्ण अच्छा स्वास्थ्य और लंबा जीवन है, बहुत शुद्ध और दिव्य शारीरिक सुंदरता, प्रचुर धन, सुंदर और आनंदमय रिश्ते हैं और आत्माएं सभी दिव्य गुणों और परमात्मा अच्छाइयों से भरी होती हैं। जहाँ बच्चों का जन्म स्पिरिचुअल यूनियन और माता-पिता के बीच शुद्ध विचारों की शक्ति के माध्यम से होता है, नाकि आजकल की तरह, विपरीत लिंग के बीच एक शारीरिक मिलन के माध्यम से। इस प्रकार की आध्यात्मिक और पवित्र विधि द्वारा सन्तानोत्पत्ति की जानकारी; हमारे धार्मिक ग्रन्थों और प्राचीन शास्त्रों में भी है, जो कि पहले 2500 वर्षों के बाद, द्वापरयुग में लिखे गए थे। इन पहले 2500 वर्षों को स्वर्ग कहा जाता है और स्वर्ग में रहने वाले मनुष्यों को देवी - देवता कहा जाता है, जिनकी आज इस दुनिया में पूजा-अर्चना की जाती है।
(कल जारी रहेगा...)

आत्मा के दिव्य गुणों का अनुभव
इस दिव्य ज्ञान का वास्तविक आनंद तब मिलता है जब हम स्वर्णिम दुनिया की उन दिव्य विशेषताओं—पवित्रता, शांति, प्रेम, आनंद—को अभी अपने भीतर जगाना शुरू करें और अपने शाश्वत स्वरूप को पहचानें। इस मेडिटेशन रूपी गीत के साथ कुछ पल रुकिए, आत्मचेतना में स्थित होइए, परमात्मा से जुड़िए और अपने भीतर स्वर्णिम दुनिया की इन गुणों को अनुभव कीजिए—ताकि शांति, पवित्रता और आनंद की वही दिव्य अवस्था आप अभी महसूस कर सकें।
अभी सुनेआज का अभ्यास
आज यह चिंतन करें कि यदि जीवन एक व्यापक विश्व नाटक का भाग है, तो हर परिस्थिति को अधिक धैर्य, स्वीकार्यता और जागरूकता के साथ देखा जा सकता है।
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