
प्रेम – आत्मा की वास्तविक पहचान
Next in Queue
About This Meditation
Theme
“जब स्वयं को कम आँको — तो अनुभव करो, मैं महान आत्मा हूँ… गुणों से भरपूर, परमात्मा की बेहद स्नेही संतान हूँ”
Benefits
यह ध्यान हमें यह महसूस कराता है कि हमारे अंदर प्यार की गहराई है, जो बिना किसी शर्त या सीमा के है। इससे हमें खुद को पूरी तरह स्वीकार करने और संतुष्ट रहने की ताकत मिलती है। जब हम शिवबाबा(प्रेम के सागर ) से जुड़ते हैं, तो हमारे अंदर निस्वार्थ प्यार की शक्ति आ जाती है, जिससे मन की सारी बेचैनी और खालीपन दूर हो जाता है और हम अंदर से खुश और संतुष्ट महसूस करते हैं।
इस तरह के ध्यान के बाद आप खुद को अंदर तक तृप्त और शांत पाएँगे... और आपके चारों तरफ प्यार और पॉजिटिव एनर्जी का अहसास होगा।
Explore More
Topics
Life stages
Commentary
मैं एक आत्मा हूँ। मैं आत्मा प्रेमस्वरूप हूँ। मेरा वास्तविक स्वरूप प्रेम है — निस्वार्थ प्रेम, वह प्रेम जो हर सीमा से ऊपर है, हर बंधन से मुक्त है। उस प्रेम में सम्पन्नता है, बेहद सुख है। प्रेम की उन्मुक्त धारा मुझ आत्मा म...
More in Inner Audit
Same topic and language
Similar Meditations
Broader matches from the same life stage and language


