12 फरवरी को प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, ऋषिकेश केंद्र द्वारा महाशिवरात्रि का पावन पर्व श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भाई-बहनों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ आदरणीय संत रवि शास्त्री जी (तुलसी मानस मंदिर), स्वामी श्री रामेश्वर गिरी जी महाराज, स्वामी श्री रघुवीर गिरी जी महाराज, योगीराज योगी आशुतोष महाराज जी, स्वामी शिवानन्द महाराज, स्वामी आलोक हरिहर गिरी जी, मेयर श्री शंभू पासवान जी तथा बी.के. मंजू दीदी, बी.के. मीना दीदी और केंद्र संचालिका बी.के. आरती दीदी द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया। दीप प्रज्वलन से पूरे सभागार में शांति और ज्ञान का संदेश फैल गया।
महंत रवि शास्त्री जी ने सभी को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि हमें किसी भी परिस्थिति में अपने धर्म को नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने बताया कि अंत समय में केवल परमात्मा का सुमिरन ही साथ जाता है।
स्वामी शिवानन्द जी महाराज ने कहा कि सुख और दुःख जीवन का हिस्सा हैं। परमात्मा हमसे दूर नहीं है, केवल हमें अपने अहंकार को हटाना है।
बी.के. मंजू दीदी ने बताया कि महाशिवरात्रि आत्मा और परमात्मा के मिलन का पर्व है। शिव निराकार, ज्योति बिंदु स्वरूप परमपिता हैं, जो अज्ञान के अंधकार को दूर करने आते हैं। यदि हम अच्छे संकल्प लें और सबको सुख देने का विचार रखें, तो संसार बेहतर बन सकता है।
योगीराज योगी आशुतोष महाराज जी ने संस्था के कार्यों की सराहना की और कहा कि यह संस्था लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रही है। उन्होंने नए भवन के लिए सभी को बधाई दी और कहा कि सच्चे संकल्प अवश्य पूरे होते हैं।
बी.के. आरती दीदी ने सरल शब्दों में समझाया कि शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और धतूरा चढ़ाने का अर्थ अपनी बुराइयों को त्यागना है।
- जल मन की शुद्धता का प्रतीक है।
- दूध पवित्रता का प्रतीक है।
- बेलपत्र तीन गुणों पर विजय का संकेत है।
- धतूरा विकारों को छोड़ने का संदेश देता है।
उन्होंने सभी को क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार छोड़कर अच्छे गुण अपनाने की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम का संचालन बी.के. सुशील भाई ने किया। अंत में 290 से अधिक भाई-बहनों ने राजयोग ध्यान किया और गहन शांति का अनुभव किया। कार्यक्रम का समापन विश्व शांति के संकल्प के साथ हुआ।




















