गुजरात के भरूच जिले में स्थित तपोवन सेवा केंद्र वर्ष 2025–26 में एक ऐसे प्रमुख आध्यात्मिक एवं स्वास्थ्य सेवा आश्रम के रूप में उभर रहा है, जहाँ देश-विदेश से बीके तथा नॉन-बीके, विभिन्न धर्मों से संबंधित आत्माएँ स्वास्थ्य लाभ एवं आत्मिक शुद्धिकरण हेतु आश्रय ले रही हैं।

दादी जानकी जी की प्रेरणा, परमात्मा की मदद, गहन तपस्या एवं दुआओं के बल पर यहाँ आने वाली आत्माएँ 2–3 सप्ताह का समय निकालकर तन और मन की शुद्धि का अनुभव कर रही हैं। तपोवन योग एंड नेचुरोपैथी सेंटर में प्राकृतिक चिकित्सा के साथ-साथ राजयोग मेडिटेशन कोर्स द्वारा आत्माओं को परमात्मा का परिचय भी प्राप्त हो रहा है।

वर्तमान समय की नाजुक परिस्थितियों को देखते हुए यह संदेश भी उभरकर सामने आ रहा है कि भविष्य में दवाइयों की उपलब्धता जैसी चुनौतियाँ सामने आ सकती हैं। ऐसे में जीवनशैली आधारित रोगों जैसे डायबिटीज, बीपी, मोटापा, कब्ज एवं दर्द आदि के लिए प्राकृतिक जीवनशैली को अपनाना ही स्थायी समाधान के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।

तपोवन में आहार, व्यायाम, श्रम, नींद, जल, वायु एवं सूर्य प्रकाश को ही औषधि के रूप में अपनाने पर विशेष बल दिया जा रहा है। साथ ही फास्टिंग एवं संकल्पों की शुद्धता को भी मन और शरीर की चिकित्सा का महत्वपूर्ण माध्यम बताया गया है।

शास्त्रों एवं ऋषि परंपरा के अनुसार फास्टिंग और तपस्या को स्वास्थ्य एवं विजय का मार्ग माना गया है, जिसे तपोवन में व्यवहारिक रूप से अनुभव कराया जा रहा है।
नेचुरोपैथी एवं योगिक जीवनशैली के साथ-साथ तपोवन में ऑर्गेनिक खेती को भी विकसित किया जा रहा है, जिसमें फल, सब्जियाँ, अनाज एवं औषधियाँ प्राकृतिक रूप से तैयार की जा रही हैं। वर्तमान में यहाँ ऑर्गेनिक गन्ने से निर्मित गुड़, घानी का शुद्ध तेल, देसी गाय का घी एवं शुद्ध गेहूं उपलब्ध कराया जा रहा है।

पिछले 10–11 वर्षों से यहाँ भोजन की व्यवस्था गोबर गैस के माध्यम से की जा रही है, जिसमें गाय के गोबर एवं किचन वेस्ट का उपयोग होता है, जिससे LPG की कमी का कोई प्रभाव तपोवन पर नहीं पड़ा। इसके साथ ही सौर ऊर्जा, वर्षा जल संचयन (Rain Water Harvesting) एवं प्राकृतिक संसाधनों के अधिकतम उपयोग की दिशा में भी निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

तपोवन में वर्ष भर चिकित्सा व्यय लगभग नगण्य रहा है, जिसका मुख्य कारण प्राकृतिक खानपान, नियमित दिनचर्या एवं आध्यात्मिक जीवनशैली है। भविष्य में और अधिक ऑर्गेनिक उत्पादन एवं औषधीय पौधों की खेती का भी विस्तार किया जा रहा है, जिससे ब्राह्मण परिवार एवं यज्ञ सेवाधारियों के स्वास्थ्य की रक्षा की जा सके।

इस प्रकार तपोवन सेवा केंद्र एक ऐसे मॉडल के रूप में विकसित हो रहा है जहाँ योग, नेचुरोपैथी, ऑर्गेनिक जीवनशैली एवं आध्यात्मिकता का समन्वय मानव कल्याण हेतु प्रस्तुत किया जा रहा है।




















